क्या है मौली-रक्षासूत्र, इसे बांधने में क्या सावधानी बरतनी चाहिए, जानिए पूरी जानकारी


मौली बांधना वैदिक परंपरा का हिस्सा है.यज्ञ के दौरान इसे बांधे जाने की परंपरा तो पहले से ही रही है, लेकिन इसको संकल्प सूत्र के साथ ही रक्षा-सूत्र के रूप में तब से बांधा जाने लगा, जबसे असुरों के दानवीर राजा बलि की अमरता के लिए भगवान वामन ने उनकी कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधा था.

नई दिल्लीः सनातन परंपरा में मौली शुभता का प्रतीक है, मौली बांधने से टल जाती है कई बाधाएं, शमौली बांधना जिसे रक्षा सूत्र भी कहते है, हर धार्मिक कार्य या पूजा के आरम्भ में तिलक के साथ यह अनिवार्य माना जाता है.मौली को कलाई में बांधने के कारण इसे कलावा भी कहते हैं.इसका वैदिक नाम उप मणिबंध भी है. 

मौली (कलावा) बांधने के सिर्फ धार्मिक हीं नहीं बल्कि वैज्ञानिक महत्व भी हैं.
आइये जानते हैं सबसे पहले मॉली के धार्मिक महत्व 

मौली का धार्मिक महत्व 
मौली बांधना वैदिक परंपरा का हिस्सा है.यज्ञ के दौरान इसे बांधे जाने की परंपरा तो पहले से ही रही है, लेकिन इसको संकल्प सूत्र के साथ ही रक्षा-सूत्र के रूप में तब से बांधा जाने लगा, जबसे असुरों के दानवीर राजा बलि की अमरता के लिए भगवान वामन ने उनकी कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधा था.



इसे रक्षाबंधन का भी प्रतीक माना जाता है, जबकि देवी लक्ष्मी ने राजा बलि के हाथों में अपने पति की रक्षा के लिए यह बंधन बांधा था.मौली को हर हिन्दू बांधता है.इसे मूलतः रक्षा सूत्र कहते हैं.

तीन धागों की मौली का तात्पर्य त्रिदेव से है - 
मौली कच्चे धागे या सूत से बनाई जाती है जिसमें मूलतः 3 रंग के धागे होते हैं.लाल, पीला और हरा, लेकिन कभी -कभी यह 5 धागों की भी बनती है जिसमें नीला और सफेद भी होता है.3 और 5 का मतलब कभी त्रिदेव के नाम की तो कभी पंचदेव.

न्नत पूरी हो जाने पर खोल दे मौली - 
मौली को हाथ की कलाई, गले और कमर में बांधा जाता है.इसके अलावा मन्नत के लिए किसी देवी-देवता के स्थान पर भी बांधा जाता है और जब मन्नत पूरी हो जाती है तो इसे खोल दिया जाता है.इसे घर में लाई गई नई वस्तु को भी बांधा जाता और इसे पशुओं को भी बांधा जाता है.
 

मौली बांधने के वैज्ञानिक कारण 
- मोली बांधने से शरीर में वात पित्त और कफ का संतुलन बना रहता है और शरीर स्वस्थ रहता है.
- डायबीटिज, ब्लड प्रेशर, लकवा और हार्ट अटैक जैसे रोगों में मौली बांधना लाभकारी होता है.
- इसके साथ ही यदि किसी यजमान के मौली बंधी हुई है और वो किसी अनुष्ठान में पूजन कर रहा हो तो सूतक का दोष लगने पर भी यह रक्षा सूत्र उस अनुष्ठान से बाधा टल जाती है.
 

शुभता का प्रतीक है मॉली 
व्यापार और घर में भी वस्तुओं पर मौली का प्रयोग नए वाहन, नए सामान , व्यापार में कलम, बही खाते, तिजोर , पूजन साम्रग्री आदि पर मौली बांधना शुभता और लाभ का प्रतीक माना जाता है.
-व्यापार में लाभ के लिए 
व्यापार में अच्छे लाभ के लिए, वाहन की सुरक्षा के लिए मौली बांधी जाती है.इससे रक्षा कवच के रूप में भी देखा जाता है वहीं नयी गाड़ियों अथवा नयी वस्तुओं में मौली अथवा कलावा बांधने से नजर नहीं लगती है.

संकटों से रक्षा करती है मौली 
मौली को कलाई में बांधने पर कलावा या उप मणिबंध करते हैं.हाथ के मूल में 3 रेखाएं होती हैं जिनको मणिबंध कहते हैं.भाग्य व जीवन रेखा का उद्गम स्थल भी मणिबंध ही है.इन तीनों रेखाओं में दैहिक, दैविक व भौतिक जैसे त्रिविध तापों को देने व मुक्त करने की शक्ति रहती है.



इन मणिबंधों के नाम शिव, विष्णु व ब्रह्मा हैं.इसी तरह शक्ति, लक्ष्मी व सरस्वती का भी यहां साक्षात वास रहता है.जब हम कलावा का मंत्र रक्षा हेतु पढ़कर कलाई में बांधते हैं तो यह तीन धागों का सूत्र त्रिदेवों व त्रिशक्तियों को समर्पित हो जाता है जिससे रक्षा-सूत्र धारण करने वाले प्राणी की सब प्रकार से रक्षा होती है।
 

मौली बांधने के नियम 
- शास्त्रों के अनुसार पुरुषों एवं अविवाहित कन्याओं को दाएं हाथ में कलावा बांधना चाहिए.विवाहित स्त्रियों के लिए बाएं हाथ में कलावा बांधने का नियम है.जिस हाथ में कलावा बंधवा रहे हों, उसकी मुट्ठी बंधी होनी चाहिए और दूसरा हाथ सिर पर होना चाहिए.
- मौली कहीं पर भी बांधें एक बात का हमेशा ध्यान रहे कि इस सूत्र को केवल 3 बार ही लपेटना चाहिए व इसके बांधने में वैदिक विधि का प्रयोग करना चाहिए.
- मौली बंधाते समय हाथ में चावल रखके मुट्ठी बांधना और साथ में दूसरा हाथ सिर पर रखे .पूजा करते समय नवीन वस्त्रों के न धारण किए होने पर मोली हाथ में धारण अवश्य करना चाहिए.धर्म के प्रति आस्था रखें.
- एक सप्ताह के बाद नई मौली धारण करें 
मंगलवार या शनिवार को पुरानी मौली उतारकर नई मौली धारण करें.संकटों के समय भी रक्षासूत्र हमारी रक्षा करते हैं.

Zee Hindustan News App: देश-दुनिया, बॉलीवुड, बिज़नेस, ज्योतिष, धर्म-कर्म, खेल और गैजेट्स की दुनिया की सभी खबरें अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें ज़ी हिंदुस्तान न्यूज़ ऐप.  

TRENDING TOPICS


   
  
 
 
 
 
 
 
 

Download the Noteica : Indiloves Trends App from